Baat karte hai
वो मेरी ही आशियानें में मुझे जलाने की बात करते है, माचिस तो लाये नहीं और आग लगाने की बात करते हैं। और हम सोये कहाँ उनकी सोहबत में रात भर, सुबह आँख लगी ही थी,और जगाने की बात करते हैं। और जब मांगा मैंने हिसाब अपने गुनाहों का, वो बातों को घुमा कर,जमाने की बात करते हैं। अगर नशा करना तो लगा देना दो बूंद होंठ पर मेरे, नशा चढ़ा ही नही ,और बहक जाने की बात करते हैं। रूठता कौन नहीं महबूब से,ये तोअदा है हसीनाओं का, हमारी इस अदा पर वो मर जाने की बात करते हैं। जरा सी बादल क्या गरजती,छुप जाते थे आँचल में मेरी, वो अब रात होते ही,चिराग़ बुझाने की बात करते है। जिसकी ज़ुबाँ पर मोती,दिल मे कोहिनूर छुपा हो, वो ना जाने फिर किस खजाने की बात करते हैं। ला देना इक टुकड़ा मेरे लिए भी उस चाँद से मांग कर, रात में देखकर जिसे आशिक़, दिल लगाने की बात करते हैं। कलियाँ मदहोश हो जाती है,जिसकी ज़रा सी तरन्नुम पर, वो तो महफ़िल में मुस्कुराने की बात करते है। अब छोड़ देंगे हम भी उनसे मुहब्बत करना, वो मुहब्बत में तो ताजमहल बनाने की बात करते है। #जाकिर
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